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चाणक्य कंसल्टेंसी भारत में स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) को समाज सेवा कार्य से सम्बंधित कंसलटेंसी सेवाएं उपलब्ध करवाती है। चाण्क्य कंसल्टेंसी गैर सरकारी संगठनों, अलाभकारी कंपनी और अन्य तरह की स्वयंसेवी संस्थाओं को पूरे भारत में कंसल्टेंसी सेवाएं देती है। इन सेवाओं में संस्था रजिस्टर करवाना, अनुदान (फंडिंग), संस्था प्रबंधन व संस्थाओं की नेटवर्किंग से संबंधित सभी तरह की कंसलटेंसी सेवाएं चाणक्य कंसल्टेंसी द्वारा दी जाती है। चाणक्य कंसल्टेंसी की कंसल्टेंसी सेवाओं के नई दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, जयपुर और चंडीगढ़ में भी कार्यालय और अधिकृत कंसल्टेंट है।
नई स्वयं सेवी संस्था (NGO) बनाने और रजिस्टर्ड करवाने में स्वैच्छिक सेवाभावी समाजसेवी व्यक्तियों और समाज सेवा का कार्य करने की मंसा रखने वाले समूहों को संस्थान के रजिस्ट्रेशन की विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत रजिस्ट्रेशन करवाने में सहायता सेवा उपलब्ध करवाई जाती है. एनजीओ के संचालन से संबंधित सभी परामर्श सेवाएं चाणक्य कंसल्टेंसी उपलब्ध कराती है जिनमें प्रोजेक्ट रिपोर्टस, प्रोजेक्ट प्रपोजल (अनुदान के लिए परियोजना तैयार करवाना), फंड जुटाने के कारगर तरीके और प्रक्रियाओं का प्रारूप तैयार करना, संस्थानों का प्रोफाइल और वार्षिक प्रतिवेदन (एनुअल रिपोर्ट) तैयार करना व सभी तरह के दस्तावेजीकरण सहित कानूनी परामर्श की कंसल्टेंसी सेवाएं भी शामिल है।
सामाजिक उद्देश्यों के साथ विस्तृत दायरे में कार्य करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमता संवर्धन करने के लिए चाणक्य इस संस्थाओं की मदद व सहयोग करती है। चाणक्य की ओर से पूरे भारत में स्वयंसेवी संस्थाओं को सभी तरह की अनिवार्य व कानूनी परामर्श सेवाएं उपलब्ध करवाई जाती है। कंसल्टेंसी सेवाएं पूरे भारत में सभी राज्यों के दूर-दराज गांव व शहरों में स्थित स्वयं सेवी संस्थाओं को सहज ही उपलब्ध करवाई जाती है।
स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ कई बरसों से कार्य करते हुए एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि बहुत सी स्वयंसेवी संस्थाएं बहुत अच्छा कार्य करती है लेकिन उनके पास उनके द्वारा किए गए कार्यों का व्यवस्थित रिकार्ड और दस्तावेज नहीं होते है। अपनी संस्था को सही कानूनी मान्यता की स्तिथि दिलाने के लिए जो औपचारिकताएं उन्हें कुछ सरकारी कार्यालयों से करवानी चाहिए वो औपचारिकताएं वो पूरी नहीं करते है। होता यह है कि अच्छी सोच व अच्छी नीयत से समाज सेवा कार्य करते रहने के बावजूद एक वक्त ऐसा आता है जब उन्हें और अधिक पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती हैं और वे संस्थाएं अनुदानकर्ताओं या सरकारी विभागों-मंत्रालयों से वित्तीय अनुदान व सहायता (फंडिंग) लेना चाहते हैं जो नहीं ले पाते हैं। इस तरह से उनके समाज सेवा कार्यों को निर्बाध रूप से चलाने में रूकावटें आती है और बहुत बार वित्तीय संसाधनों के भाव में संस्था को चलाना मुश्किल हो जाता है।
संस्था का प्रबंधन और संचालन एक ऐसा समाजसेवा और समाज कल्याण से जुड़ा कार्य है जिसमें संस्था को लगातार व हमेशा सपोर्ट-सहयोग की आवश्यकता होती है। संस्थाओं की प्राथमिकताएं सेवा-कल्याण कार्यों के विविध कार्यक्रमों का पूरी तरह से क्रियान्वयन करना होता है। इसके लिए जरूरी है कि उन्हें सही समय पर वित्तीय सहायता भी मिले।
जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली और बड़ी संस्थाएं जो समाज के वंचित क्षेत्र की बेहतरी के लिए कार्य करती है उन्हें वित्तीय सहायता (फंड) की आवश्यकता होती है। इसके लिए संस्थाओं को राज्य व केन्द्र सरकार के साथ मिलकर सरकारों की विभिन्न तरह की जन कल्याणकारी व विकास परियोजनाओं में भागीदारी करके कार्य करना होता है। केन्द्र सरकार, राज्य सरकारें, कारपोरेट सेक्टर (जिन्हें सीएसआर (CSR) के तहत समाज सेवा कार्य के लिए अपने लाभ का अनुदान देना होता है) व अन्य विदेशी फंडिंग एजेंसीज विभिन्न तरह के समाज सेवा व विकास-उन्नति के सामाजिक कार्यों के लिए संचालित होने वाली विभिन्न परियोजनाओं को अनुदान के रूप में आर्थिक मदद करती है। विभिन्न सरकारी, अर्द्धसरकारी व गैर सरकारी समाज सेवा कल्याण-विकास परियोजनाएं संस्थाओं के भागीदारी व सहयोग से ही पूरी होती है, संचालित होती है। इसलिए चाणक्य कंसल्टेंसी संस्थाओं के विभिन्न फंडिंग एजेंसीज से उनके विभिन्न कल्याणकारी-विकास योजनाओं के लिए फंड मिलता रहे इसके लिए संस्था प्रबंधन, दस्तावेजीकरण (documentation),  अन्य संस्थाओं के साथ नेटवर्किंग व विभिन्न आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने में सहयोग करती है।
संस्था अपनी परियोजना की जरुरत जितना वित्तीय अनुदान प्राप्त कर लेती है तो उनकी परियोजना को साकार होने के सारे रास्ते खुल जाते हैं। एक खुशहाल सुखद भविष्य की आस लगाए कई लोगों के सपने फंड व सपोर्ट मिलने से हकीकत में बदल जाते हैं। एक सकारात्मक परिवर्तन के साथ समाज के कई वंचित विकास की मुख्यधारा में शामिल हो जाते हैं।
चाणक्य कंसल्टेंसी के पास समर्पित व अनुभवी स्वयंसेवी संस्था परामर्शदाताओं की पूरी टीम है जो संस्थाओं की जरूरत के अनुसार विभिन्न विषयों-मुद्दों व क्षेत्रों में उचित एवं वास्तविक परामर्श-सहयोग देती है। यदि स्वयं सेवी संस्थाएं हमारी सलाह के अनुसार संस्था गतिविधियां संचालित करती हैं तथा संस्था की सम्पूर्ण गतिविधियों का व जरूरी कानूनी औपचारिकताओं का दस्तावेजीकरण (डोक्युमेंटेशन) करवाती हैं तो उन्हें संस्था संचालन, प्रबंधन में व अनुदान जुटाने में मदद मिलती है।
केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों से तथा विदेशी संस्थाओं से अनुदान लेने के लिए कौन-कौन सी कागजी कार्यवाही करनी होती है उसकी प्रक्रिया क्या है? इसके लिए किस सरकारी कार्यालय में सम्पर्क करना होता है? यह सभी परामर्श व मार्गदर्शन हमारी कंसल्टेंसी सेवाओं में शामिल है। चाणक्य समाजसेवी व्यक्तिओं को संस्था बनाने से लेकर संस्था कार्यक्रमों और गतिविधियों का विस्तार करने तक में सभी स्तर पर पूरा सहयोग देती है। संस्था रजिस्ट्रेशन से कार्य की शुरूआत करने से लेकर सभी तरह की तकनीकी व कानूनी सहयोग में चाणक्य से सहायता ली जा सकती है। चाणक्य कंसल्टेंसी की एक्सपर्ट टीम संस्थाओं (NGO) को सभी तरह से सपोर्ट करती है। चाणक्य का कार्य संस्थाओं के सभी तरह के कार्यक्रमों व गतिविधियों को आसान बनाना है। हम देश के विभिन्न भागों/हिस्सों व शहरों में स्वयंसेवी संस्थाओं से संबंधित सभी तरह की कंसल्टेंसी सेवाएं उपलब्ध करवाते हैं।
जरूरतमंद स्वयंसेवी संस्थाओं और फंड देने वाले अनुदानकर्ताओं के मध्य संवाद बना रहे इसके लिए वे सोशल मीडिया का किस तरह से उपयोग करें इस पर भी हम विस्तार से संस्थाओं को जानकारी देते हैं। संस्था की अपने क्षेत्र में बहुत अच्छी छवि व पहचान बने इसके लिए संस्था को किस तरह से कार्य करना है ताकि संस्था जरूरी मुद्दों को अपनी कार्यगतिविधियों में प्राथमिकताओं में रखे? संस्था के कार्यक्षेत्र में किस तरह के कार्य की ज्यादा जरूरत है? संस्था के कार्यक्षेत्र की प्रमुख समस्याओं और जरूरतों को संस्था कैसे जाने? उसका समाधान कैसे और क्या होता है? केन्द्र व राज्य सरकारें इसके लिए कौन कौन से प्रोजेक्ट फंडिंग कर रही हैं? सरकारी योजनाओं से संस्थान व उसके कार्यक्षेत्र के लोग किस तरह से जुड़ सकते हैं?
स्वयं सेवी संस्थाओं का एक मुख्य कार्य सामाजिक जागरूकता फैलाना भी है। जागरूकता-सजगता अभियान, सदस्यता अभियान, राहत-अभियान (भूकम्प/प्राकृतिक आपदा आदि में), कानूनी सजगता अभियान, बेरोजगारों की रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कार्यक्रम किस तरह से आयोजित करें जिससे उपलब्ध वित्तीय व मानव संसाधन से अधिक से अधिक लोगों को राहत-सहायता मिल सके। संस्थाएं इस तरह के कैम्पेन का किस तरह से नेतृत्व करें? अपने क्षेत्र में अनुभवी चाणक्य कंसल्टेंसी संस्थाओं और सामाज सेवा संगठनों को इसके लिए पूरा मार्गदर्शन देती है।